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पांच-दिवसीय कामवन की पंचकोसी यात्रा 18 अगस्त से

 

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649

 

कामां डीग जिले के कामवन धाम में श्री कृष्ण भगवान की क्रीड़ा स्थली आदि वृन्दावन धाम कामवन की पंचकोसी यात्रा 18 अगस्त सोमवार से प्रारंभ होगी !
राधावल्लभ जी मन्दिर सेवायत अधिकारी पंडित आशुतोष कौशिक नूनू पुजारी व सेवायत वर्तमान यात्राअध्यक्ष व कथा प्रवक्ता पंडित मोनू कौशिक. व्यवस्थापक पंडित विष्णु कौशिक. यात्रा पण्डा पंडित जुगनू कौशिक.एवं भक्त राजू अरोड़ा ने बताया कि राधावल्लभ मन्दिर से 200 वर्षो से कामवन की कथा पंचकोसी यात्रा के माध्यम से सुनाई जाती है हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भाद्रपद कृष्ण पक्ष दशमी तारीख 18 अगस्त सोमवार से प्रारंभ होगी जिस काम्यवन धाम के अंतर्गत सकल लीलाओं की अधिष्ठात्री श्री वृन्दा देवी जिन वृन्दा देवी की तथा काम्यवन की यात्रा करने देश विदेश तथा बड़ी दूर के यात्री यात्रा करने आते हैं कामसेन राजा द्वारा बसाई गई तथा विश्वकर्मा द्वारा निर्मित इस नगरी में 84 तीर्थ 84 मन्दिर 84 खम्भा 300 कूप छै करोड़ साठ हजार छै सौ सिंहासन जो कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण चंद्र के लीला केन्द्र रहें यानि ये 84 तीर्थ 84 मन्दिर 84 खम्भा 300 कूप ये काम्यवन में किस प्रकार प्रगट हुए हैं इनका महत्व इति काम्यवन महात्म उक्त च पंचम काम्यकं वनं वनानां वनुमुत्तमम; तत्र गत्वा नरो देवी मम् लोके महीयते
बृज के वन 12 में से ये कामवन परमश्रेष्ठ पांचवां वन है जो कामवन की यात्रा करके मनुष्य स्त्री बैकुंठ में बास करें है भगवान श्री बाराह जी ने पृथ्वी से कहा कि हे वसुन्धरे सर्वेषुकाम्यकवन श्रेष्ठ एतदेव परंमतं इन सब वनन में काम्यवन परमश्रेष्ठ पांचवां वन है मेरा परम मत है
माघ मासे प्रयागे तुयत्फलं लभते नर तत फलं लभते देवी काम्यके पंचभि दिनै अर्थ माह मास के महीना में प्रयाग राज में स्नान करने का जो फल मिलता है वो फल कामवन में पांच दिन निवास करने से तथा काम्यवन की पंचकोसी परिक्रमा करने से प्राप्त होता है पुजारी ने बताया की कामवन की पांच दिवसीय पंचकोसी यात्रा प्रथम दिवस 18 अगस्त सोमवार मन्दिर राधावल्लभ जी से विधिवत पूजा अर्चना के बाद यात्रा प्रारम्भ होगी 22 अगस्त शुक्रवार को मन्दिर राधावल्लभ जी मे समापन होगी यात्रा का विधि विधान से संकल्प लेने के बाद भजन कीर्तन व बैण्ड बाजो के साथ गोविन्द देव वृन्दा रानी मन्दिर पहुंचेगी कथा के बाद यहां से परिक्रमा लाल दरवाजा से मन्दिर श्री गणेश व गोरी शंकर महादेव जी क्रय-विक्रय से बड़े रामजी विष्णु सिंहासन शिवशक्ति मन्दिर तमोलिया बगीची यहां कामवन महात्म कथा होगी यहां से चरन कुण्ड मन्दिर गरुड़ जी महाराज गरुड़ कुण्ड से कच्ची पक्की तलइया चन्द्रेश्वर महादेव चन्द्र भागा कुण्ड पुष्करणी यहां भजन कीर्तन व कथा के बाद डाक-बंगला स्थित मन्दिर कालका जी यहां पर भजन कीर्तन व कामवन महात्म कथा होगी यहां से यात्रा मन्दिर के पीछे से होते हुए बारहा कुण्ड से धर्मकुण्ड से पांचों पाण्डव मन्दिर से पातालेश्वर महादेव से टीले वाले हनुमान जी पर कथा समापन के बाद पंचतीर्थ कुण्ड नृरसिंह मन्दिर से बाऊजी मौहल्ला वापसी वृन्दा देवी मन्दिर प्रथम दिवस की यात्रा सम्पन्न होगी
दूसरे दिवस 19 अगस्त मंगलवार को परिक्रमा वृन्दा रानी कथा के बाद यहां से परिक्रमा गणेश जी सिद्ध बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर मार्णीकण्का गंगा से बाबा भुतिया बगीची से अस्पताल के बराबर से होते हुए बालाजी मंदिर से विमल कुण्ड शनिदेव हनुमान जी कांवड़ियां मुरली मनोहर मन्दिर पर कथा हरी बोल सन्तोषी मां मन्दिर प्राचीन कामसेन छतरी पर भजन कीर्तन व कामवन महात्म कथा यहां से यात्रा गिर्राज जी विमल बिहारी से चामुंडा देवी यशोदा कुण्ड से पंचवटी सेतुबंधलंका रामेश्वरम महादेव से भगतजी चकलेश्वर महादेव से प्रयाग कुण्ड गया कुण्ड गदाधर भगवान मन्दिर पर भजन कीर्तन व कामवन महात्म कथा होगी यहां से परिक्रमा नला बाजार होते हुए वापिस वृन्दा देवी मन्दिर समापन होगी
तिसरे दिवस 20 अगस्त बुधवार को वृन्दा देवी से परिक्रमा मन्दिर नला बाजार मन्दिर बंगाली से एतिहासिक चील महल प्राचीन भैरव मंदिर से गया कुण्ड से जोगी आसन लुक लुक कुण्ड से चरन पहाड़ी पर भजन कीर्तन कामवन महात्म कथा सात सखाओं के कुण्ड से धेरे वाली चामुंडा भैरव मन्दिर से मनसा देवी मंदिर से देवी गेट मोहल्ला लाहौरी मन्दिर गोपीनाथ जी के पीछे से होते हुए बाबा भूमिया बुर्ज लाला मोहल्ला ओम कालेश्वर महादेव लक्कड़ बाजार त्रिकूटेश्वर महादेव त्रिकुटिया बाजार लाल दरवाजा मेन बाजार छत्ता मोहल्ला वृन्दा देवी मंदिर पहुंचेगी चोथे दिवस 21 अगस्त गुरुवार को वृन्दा देवी से लाल दरवाजा कोट ऊपर गणेश जी कोटेश्वर महादेव महाकालेश्वर कोट ऊपर प्राचीन कल्याण राय मदनमोहन जी मन्दिर से चौरासी खम्भा लाल दास मन्दिर से मन्दिर गोपीनाथ जी पर कामवन महात्म कथा यहां से गोपेश्वर महादेव से श्री कुण्ड सुरभि कुण्ड पर कथा चक्रतीर्थ से घीसलनी सिला इन्द्र सैन पर्वत करावटा गांव से भोजन थाली क्षीर सागर कुण्ड यहां पर भजन कीर्तन व कामवन महात्म कथा यहां से परिक्रमा गांव टायरा रोड़ स्थित कपूर डेरी से कोसी रोड़ अनाज मंडी कोसी चौराहे से अम्बेडकर चौराहे से जाहरवीर गोगाजी मन्दिर से मौहल्ला काजी पाड़ा स्थित काष्र्णि मन्दिर से दहेली मौहल्ला सैनी चौपाल राधा माधव मन्दिर से बल्लू बास रोड़ किन्नर मार्केट होते हुए मैन बाजार सूर्यनारायण मंदिर मदन मोहन सिंगल वाली गली में से होते हुए वृन्दा रानी मंदिर वापसी परिक्रमा समापन होगी पांचवें दिवस 22 अगस्त शुक्रवार को वृन्दा रानी से राधा वल्लभ ठाकुर जी विदाई परिक्रमा वृन्दा रानी मंदिर के पीछे से कामवन के सभी मंदिरों की परिक्रमा व दर्शन करते हुए मन्दिर सत्यनारायण से सूर्यनारायण से पंचायती गोपाल जी से बाऊजी मौहल्ला बिहारी जी से सब्जी मंडी चरणेश्वर महादेव से गिर्राज जी से सीतारामजी से कुट्टी मौहल्ला बिहारी जी छावड़ा लक्ष्मी नारायण मन्दिर बैजनाथ महादेव छोटे रामजी से पुरानी तहसील गिर्राज जी से दाउजी मनकामेश्वर महादेव कामेश्वर महादेव पंचमुखी महादेव से धर्मराज जी परशुराम जी से दाऊजी से मन्दिर मदन मोहन जी चंद्रमा जी मन्दिर लक्ष्मीनारायण जी पुराना बस स्टैंड चौक मोहल्ला चित्र गुप्त मन्दिर से वृंदा रानी मंदिर चौधरी हनुमान जी मन्दिर लाल दरवाजा लालेश्वर हनुमान जी से नगर कोट मइया खारी कुइयां से गंगा मंदिर से लक्ष्मीनारायण पुजारी मंदिर लड्डू गोपाल बंगाली मंदिर से वापिस मन्दिर गोपाल जी पुजारी से भवानी शंकर मंदिर पहुंचेगी यहां पर कामवन महात्म कथा सुनाई जाएगी उसके बाद परिक्रमा वापसी राधा वल्लभ जी मन्दिर पहुंचेगी वहां पर भजन कीर्तन और कामवन महात्म की कथा पांचो दिन की कथा भी सुनाई जाएगी उसके उपरांत परिक्रमा राधावल्लभ जी से बस स्टैंड पवनकुंज मन्दिर कुंज बिहारी जी से मन्दिर सूर्यनारायण सूरजकुंड से हरमिलाप मंदिर से शीतल कुंड से मन्दिर ज्वाला देवी अम्बेडकर चौराहे होते हुए कोसी चौराहे चरण कुंड पर यात्रा संपूर्ण यहां से राधा वल्लभ जी के मंदिर वापिस पांच दिवस की कामवन की पंचकोसी पदयात्रा सम्पूर्ण होगी !!

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